नीति और योजनाएं
बजट 2026 पर DD किसान की नज़र: खेत, किसान और पानी पर केन्द्रित सीधा प्रसारण, विशेषज्ञों संग गहन मंथन, 1 फरवरी को सुबह 9 बजे
आम बजट केवल सरकार की आय–व्यय की सूची नहीं होता, बल्कि आने वाले वर्ष में देश की दिशा और प्राथमिकताओं का मानचित्र भी होता है। जब देश की लगभग आधी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खेती–किसानी पर निर्भर हो, तब यह सवाल और अहम हो जाता है कि बजट में किसानों के लिए क्या है, उनकी आय बढ़ाने के लिए कैसी नीतियाँ बन रही हैं, और खेती के लिए ज़रूरी पानी को बचाने और बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के क्या उपाय किए जा रहे हैं। इन्हीं अहम सवालों को केन्द्र में रखकर DD किसान 1 फरवरी को सुबह 9 बजे से बजट सत्र का सीधा प्रसारण और विशेष पैनल चर्चा प्रसारित करने जा रहा है।
इस विशेष कार्यक्रम की सबसे बड़ी ख़ासियत यह होगी कि इसमें केवल बजट के प्रावधानों की व्याख्या ही नहीं होगी, बल्कि यह समझने की कोशिश भी की जाएगी कि इन प्रावधानों का ज़मीन पर, यानी खेत-खलिहान, गाँव और किसान के घर तक क्या वास्तविक असर पहुँचेगा। स्टूडियो में मौजूद विशेषज्ञ पैनल किसानी से जुड़े हर पक्ष – उत्पादन, मार्केटिंग, जल-संरक्षण, सिंचाई, तकनीक, बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य, ग्रामीण रोज़गार और सहकारी ढाँचे – पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि दर्शकों, खासकर किसानों को बजट की बारीकियाँ आसान भाषा में समझ में आ सकें।
डॉ. अंकित पांडेय सहित वरिष्ठ विशेषज्ञों की मौजूदगी
DD किसान के इस विशेष बजट कार्यक्रम की एक और बड़ी विशेषता है पैनल की उत्कृष्ट और विविध विशेषज्ञता। देश के वरिष्ठ पत्रकारों, कृषि–अर्थशास्त्रियों, जल–विशेषज्ञों और नीति–विश्लेषकों के साथ-साथ इसबार पैनल में प्रख्यात वरिष्ठ पत्रकार और कम्युनिकेशन एक्सपर्ट डॉ. अंकित पांडेय भी शामिल होंगे।
डॉ. अंकित पांडेय मीडिया और संचार की दुनिया में एक जाना–पहचाना नाम हैं। वे लंबे समय से ग्रामीण विकास, कृषि, जल–प्रबंधन और सामाजिक क्षेत्र की नीतियों पर लिखते–बोलते रहे हैं। जटिल नीतिगत सवालों को आम लोगों की भाषा में, विशेष रूप से ग्रामीण और किसान दर्शकों तक पहुँचाने की उनकी क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती है। यही कारण है कि DD किसान ने इस वर्ष के बजट विशेष में उन्हें पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया है, ताकि बजट की पेचीदा धाराओं और संख्याओं को वे किसानों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़कर समझा सकें।
पैनल में अन्य विशेषज्ञों के रूप में कृषि–अर्थशास्त्र, ग्रामीण वित्त, फसल बीमा, जल–संरक्षण और सिंचाई योजना, तथा सहकारिता मॉडल के जानकार भी रहेंगे। इस तरह यह पैनल बहु–आयामी दृष्टिकोण के साथ बजट का विश्लेषण करेगा, जिससे दर्शक केवल सरकारी घोषणाओं को सुनने तक सीमित न रहें, बल्कि यह भी समझ सकें कि इन घोषणाओं का दीर्घकालिक सामाजिक–आर्थिक प्रभाव क्या हो सकता है।
फोकस: किसान भाईयों को क्या लाभ मिलेगा?
इस बजट विशेष कार्यक्रम का मूल प्रश्न यही रहेगा कि ‘‘किसान भाईयों के लिए बजट में क्या है?’’ DD किसान की टीम और विशेषज्ञ पैनल निम्न प्रमुख मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा करेगा:
– क्या किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए प्रावधान या योजनाएँ घोषित की जा रही हैं
– न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नीति में कोई बदलाव या विस्तार
– खाद, बीज, कीटनाशक और डीज़ल जैसी प्रमुख लागतों पर सब्सिडी का ढाँचा
– कृषि–उत्पाद के भंडारण, प्रोसेसिंग और वैल्यू–एडिशन के लिए बजटीय प्रावधान
– किसान क्रेडिट कार्ड, सस्ती दर पर ऋण और सहकारी बैंकों के लिए सहायता
– कृषि–बाज़ार सुधार, ई–नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (e-NAM) और ऑनलाइन ट्रेडिंग
– प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और मिलेट्स (श्रीअन्न) को बढ़ावा देने के लिए सहायता
कार्यक्रम का एक हिस्सा विशेष रूप से इस बात पर केन्द्रित होगा कि पिछले वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के संदर्भ में अब तक क्या प्रगति हुई है और इस नए बजट से उस दिशा में आगे बढ़ने की कितनी संभावनाएँ दिखाई देती हैं। इस संदर्भ में डॉ. अंकित पांडे जैसे अनुभवी पत्रकार और कम्युनिकेशन एक्सपर्ट नीति–दस्तावेज़ों और ज़मीनी रिपोर्टिंग दोनों के आधार पर ठोस और संतुलित राय रखेंगे।
वे यह भी समझाने की कोशिश करेंगे कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उनकी क्रियान्वयन–प्रणाली, ज़मीनी स्तर पर पहुँच, पारदर्शिता और पंचायत से लेकर ज़िला स्तर तक की प्रशासनिक क्षमता भी उतनी ही अहम है। उदाहरण के लिए, फसल बीमा योजना का प्रावधान तो कागज़ पर बेहतर दिख सकता है, पर यदि क्लेम सेटेलमेंट में देरी हो या सर्वे की प्रक्रिया पारदर्शी न हो, तो किसानों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता।
जल की बचत पर खास ज़ोर
DD किसान की इस विशेष चर्चा का दूसरा बड़ा फोकस होगा – ‘‘पूरा देश जल की बचत कैसे करेगा?’’ भारत जैसे देश में, जहाँ कई क्षेत्र लगातार सूखे, अनियमित वर्षा और भू–जल के अत्यधिक दोहन जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहाँ जल–संसाधन प्रबंधन बजट की प्रमुख प्राथमिकता होना चाहिए। कार्यक्रम में विशेषज्ञ यह परखेंगे कि बजट में:
– जल–संरक्षण, चेक डैम, तालाब, पोखर और जलाशय निर्माण के लिए कितनी राशि निर्धारित की गई है
– ‘‘हर खेत को पानी’’ और ‘‘जल जीवन मिशन’’ जैसी योजनाओं के लिए प्रावधान
– माइक्रो–इरिगेशन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी
– कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को प्रोत्साहित करने की नीति
– नदी–जोड़ो परियोजनाओं या बड़े–मध्यम सिंचाई प्रोजेक्ट्स के लिए निधि
विशेषज्ञ यह भी चर्चा करेंगे कि बदलती जलवायु और मौसम–पैटर्न के बीच जल–प्रबंधन की नीतियों में क्या प्रकारांतर देखने को मिल रहा है। क्या बजट केवल बड़े–बड़े प्रोजेक्ट्स पर ज़ोर देता है, या फिर गाँव–स्तर पर छोटे, टिकाऊ और समुदाय–आधारित समाधानों के लिए भी पर्याप्त संसाधन प्रदान करता है?
डॉ. अंकित पांडेय इस संदर्भ में संचार और जागरूकता की भूमिका पर प्रकाश डालेंगे। जल–संरक्षण केवल इंजीनियरिंग या परियोजना–प्रबंधन का सवाल नहीं है, यह सामाजिक व्यवहार, सामुदायिक भागीदारी और जन–आंदोलन का भी सवाल है। वे बताएँगे कि मीडिया, खासतौर पर DD किसान जैसे सार्वजनिक सेवा चैनल, किस तरह किसानों और ग्रामीण समुदायों तक यह संदेश पहुँचा सकते हैं कि पानी की हर बूंद की कीमत है और सामूहिक रूप से की गई बचत का लाभ पूरे समाज को मिलता है।
बजट में जल–योजनाएँ: कागज़ से खेत तक
जल–प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा करते हुए कार्यक्रम में यह भी देखा जाएगा कि पिछले वर्षों में चल रही प्रमुख योजनाओं – जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जल जीवन मिशन, अटल भू–जल योजना, नमामि गंगे आदि – को इस बार के बजट में कितनी राशि और किस रूप में दी गई है। साथ ही, क्या कोई नई पहल की घोषणा की गई है, विशेष रूप से:
– वर्षा–जल संचयन (रूफटॉप और गाँव–स्तर पर)
– भू–जल रिचार्ज स्ट्रक्चर
– पारंपरिक जल–स्रोतों के पुनर्जीवन
– शहरी–ग्रामीण जल–संतुलन और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग
पैनल इस बात की भी समीक्षा करेगा कि क्या बजट में जल–डेटा मैनेजमेंट, रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और भू–जल मानचित्रण के लिए तकनीकी निवेश का प्रावधान है। यह सब इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि योजनाएँ वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हों और अनुमान के बजाय साक्ष्य–आधारित नीति–निर्माण को बढ़ावा मिले।
कृषि योजनाएँ: बीज से बाज़ार तक
DD किसान का यह विशेष कार्यक्रम कृषि योजनाओं को केवल एक सेक्टर के रूप में नहीं, बल्कि समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से देखेगा। चर्चा में ‘‘बीज से बाज़ार तक’’ की पूरी शृंखला को सामने रखा जाएगा:
– उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता और अनुसंधान के लिए बजटीय सहयोग
– मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मिट्टी परीक्षण और पोषक तत्व–प्रबंधन
– कृषि–यंत्रों और स्मार्ट–टेक्नोलॉजी (ड्रोन, सेंसर, AI आधारित समाधान) के लिए सहायता
– कोल्ड–चेन, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स विकास पर प्रावधान
– FPOs (किसान उत्पादक संगठन), सहकारी समितियों और किसान–समूहों को वित्तीय–तकनीकी मदद
विशेषज्ञ यह परखेंगे कि क्या बजट में कृषि अनुसंधान और शिक्षा, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि–विज्ञान केन्द्रों और विस्तार सेवाओं के लिए पर्याप्त संसाधन रखे गए हैं या नहीं। क्योंकि, नई तकनीक, उन्नत किस्में और बेहतर खेती–तकनीक तभी किसानों तक पहुँच पाती हैं जब प्रयोगशाला से लेकर खेत तक की कड़ी मज़बूत हो।
डॉ. अंकित पांडेय इस खंड में संचार–रणनीति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए यह रेखांकित करेंगे कि केवल नीति बना देना काफी नहीं, किसानों तक सही, समयबद्ध और व्यावहारिक जानकारी पहुँचना भी उतना ही जरूरी है। वे बताएँगे कि कैसे DD किसान जैसे चैनल, रेडियो, मोबाइल–ऐप, सोशल मीडिया और स्थानीय भाषा के प्लेटफॉर्म मिलकर ‘‘कृषि ज्ञान की एक समावेशी इको–सिस्टम’’ तैयार कर सकते हैं, जिसमें कोई भी छोटा या सीमांत किसान सूचना से वंचित न रहे।
किसानों की आय बढ़ाने की राह
केंद्रीय बजट के संदर्भ में पिछले कई वर्षों से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य चर्चा का विषय रहा है। इस बार भी कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा इस प्रश्न पर केन्द्रित होगा कि:
– आय बढ़ाने के मामले में अब तक क्या उपलब्धियाँ और क्या कमियाँ रहीं
– नए बजट में किस प्रकार के संसाधन और नीतिगत संकेत मिलते हैं
– कृषि–आधारित उद्योगों, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य–पालन, मधुमक्खी–पालन आदि के लिए क्या प्रावधान हैं
पैनलिस्ट यह भी बताएँगे कि केवल फसल–उत्पादन पर निर्भर रहकर किसानों की आय को स्थिर और मज़बूत बनाना मुश्किल है। विविधीकरण, वैल्यू–एडिशन, सीधी बाज़ार पहुँच, ई–कॉमर्स प्लेटफॉर्म, एग्री–टूरिज़्म, और स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना जैसे उपायों से ही आय के स्थायी स्रोत तैयार हो सकते हैं। चर्चा में यह देखा जाएगा कि क्या बजट इन सभी आय–स्रोतों को बढ़ाने के लिए पर्याप्त दिशा और सहयोग देता है।
डॉ. अंकित पांडेय इस संदर्भ में मीडिया–कवरेज में संतुलन की जरूरत पर भी बात रख सकते हैं। अक्सर राष्ट्रीय मीडिया में कृषि–संवाद केवल संकट या आंदोलन के समय ही सुर्खियों में आता है, जबकि रोज़मर्रा के सकारात्मक बदलाव, नवाचार और सफल मॉडल कम ही सामने आ पाते हैं। वे इस बात पर ज़ोर देंगे कि DD किसान जैसा प्लेटफॉर्म किसानों की कहानियों, उनके नवाचारों और स्थानीय समाधानों को राष्टरीय स्तर पर दिखाने का अनूठा माध्यम है, जिससे नीति–निर्माताओं को भी जमीनी हकीकत समझने में मदद मिलती है।
जल–संकट और जल–समाधान: दो चेहरों की कहानी
देश के अनेक हिस्सों में जल–संकट लगातार गंभीर रूप ले रहा है। कहीं भू–जल का स्तर तेज़ी से नीचे जा रहा है, तो कहीं अनियमित मानसून के कारण बुवाई–कटाई के चक्र बिगड़ रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ राज्यों और ज़िलों में पंचायतों, किसानों के समूहों और सामाजिक संगठनों ने मिलकर उल्लेखनीय जल–संरक्षण के मॉडल भी विकसित किए हैं।
DD किसान के इस कार्यक्रम के दौरान ऐसे सफल मॉडल और कहानियाँ भी सामने लाई जाएँगी, ताकि बजट में जल–संबंधी प्रावधानों पर चर्चा करते समय केवल चुनौतियाँ ही नहीं, बल्कि समाधान भी पूरे परिप्रेक्ष्य में दिख सकें।
डॉ. अंकित पांडेय और अन्य विशेषज्ञ यह समझाने की कोशिश करेंगे कि बजट अगर जल–संसाधन प्रबंधन के लिए पर्याप्त संसाधन और नीति–सहयोग देता है, तो उस पर अमल करने के लिए समुदाय–आधारित भागीदारी और स्थानीय नेतृत्व कितना ज़रूरी है। वे इस बात पर भी ज़ोर देंगे कि जल–प्रबंधन को केवल सिंचाई या पेयजल की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि कृषि–उत्पादन, ग्रामीण रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक–न्याय से जुड़े व्यापक मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए।
युवाओं, महिला किसानों और छोटे किसानों की हिस्सेदारी
कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण आयाम यह भी होगा कि नए बजट में युवा किसानों, महिला किसानों और छोटे–सीमांत किसानों को लेकर क्या विशेष पहल की गई है। पैनल में बैठी विशेषज्ञ–मंडली निम्न बिंदुओं को भी चिह्नित करेगी:
– क्या महिला स्वयं–सहायता समूहों (SHGs) और FPOs के लिए अलग से प्रोत्साहन दिया गया है
– युवा उद्यमियों के लिए एग्री–स्टार्टअप, एग्री–टेक्नोलॉजी, ग्रामीण–इनोवेशन लैब जैसी योजनाओं पर बजट प्रावधान
– छोटे खेतों वाले किसानों के लिए सामूहिक खेती, कस्टम हायरिंग सेंटर, साझा मशीनरी बैंकों के लिए सहायता
– सामाजिक–सुरक्षा योजनाओं – पेंशन, बीमा, दुर्घटना–सुरक्षा – में किसानों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास
डॉ. अंकित पांडेय विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि कैसे ग्रामीण भारत के युवा और महिलाएँ यदि सही जानकारी, प्रशिक्षण और वित्तीय–सहयोग से लैस हों, तो वे कृषि–क्षेत्र में नई ऊर्जा और नवाचार ला सकते हैं। यहाँ संचार की भाषा, माध्यम और संदेश तीनों का संतुलन बेहद ज़रूरी हो जाता है – और DD किसान जैसे चैनल इस संतुलन को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
DD किसान की भूमिका: सूचना से सशक्तिकरण तक
इस पूरे कार्यक्रम के केंद्र में केवल बजट नहीं, बल्कि ‘‘सूचना के माध्यम से किसान–सशक्तिकरण’’ की भावना भी रहेगी। DD किसान का मकसद सिर्फ़ सरकारी घोषणाएँ दोहराना नहीं है, बल्कि उन्हें समझाना, उनका विश्लेषण करना और दर्शकों के सवालों के संदर्भ में उन्हें परखना भी है।
चर्चा के दौरान एंकर और पैनलिस्ट यह कोशिश करेंगे कि जटिल आर्थिक शब्दावली और तकनीकी भाषा को सरल, सहज और किसान–हितैषी तरीके से समझाया जाए। उदाहरण के लिए, यदि बजट में ‘‘कृषि–क्रेडिट लक्ष्य’’, ‘‘इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड’’, ‘‘सबवेंशन’’ या ‘‘स्टार्टअप इकोसिस्टम’’ जैसे शब्दों का प्रयोग होता है, तो उनका सीधा और व्यावहारिक अर्थ किसानों के संदर्भ में स्पष्ट किया जाएगा।
डॉ. अंकित पांडेय की विशेषज्ञता यहाँ प्रमुख रूप से सामने आएगी, क्योंकि वे मीडिया और संचार की भाषा–शक्ति को भलीभाँति समझते हैं। वे यह इंगित कर सकते हैं कि किस तरह सही समय पर सही शब्द किसानों के मन में उम्मीद, आत्मविश्वास और सहभागिता की भावना जगा सकते हैं, जबकि तिरस्कार–पूर्ण या दूर की भाषा उलटा प्रभाव डाल सकती है।
कार्यक्रम का स्वरूप: लाइव टेलीकास्ट और इंटरैक्टिव सेगमेंट
DD किसान का यह विशेष बजट कार्यक्रम सुबह 9 बजे से सीधे प्रसारित होगा। बजट भाषण के दौरान महत्वपूर्ण घोषणाओं, विशेषकर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी बातों पर तुरंत फोकस किया जाएगा। जैसे ही वित्त मंत्री कृषि–क्षेत्र या ग्रामीण विकास से संबंधित किसी नए प्रावधान की घोषणा करेंगे, DD किसान के स्टूडियो में बैठे विशेषज्ञ उसका संक्षिप्त विश्लेषण देंगे, ताकि दर्शकों को तुरन्त उसकी अहमियत समझ आए।
बजट भाषण के बाद, एक विस्तृत पैनल–चर्चा का आयोजन होगा, जिसमें:
– बजट के प्रमुख बिंदुओं की संक्षिप्त रूप में पुनरावृत्ति
– किसानों, जल–संसाधनों और कृषि–उद्योगों से जुड़े प्रावधानों का विश्लेषण
– संभावित सकारात्मक प्रभाव और चुनौतियाँ
– नीतिगत सुझाव और आगे की दिशा पर चर्चा
कार्यक्रम के कुछ हिस्सों में रिकॉर्डेड पैकेज, ग्राउंड रिपोर्ट और किसानों के बाइट भी शामिल किए जा सकते हैं, जिनमें अलग–अलग राज्यों के किसान अपनी उम्मीदें, प्रतिक्रियाएँ और सुझाव साझा करेंगे। इससे बजट के राष्ट्रीय दस्तावेज़ को एक जीवंत और मानवीय संदर्भ मिलेगा।
खेत की मिट्टी से जुड़ा बजट विमर्श –
अक्सर बजट पर होने वाली चर्चाएँ केवल बड़े शहरों के टीवी–स्टूडियो, शेयर बाज़ार और कॉरपोरेट–दुनिया के इर्द–गिर्द सिमट जाती हैं। परंतु DD किसान का यह विशेष कार्यक्रम बजट विमर्श को खेत की मिट्टी, गाँव के तालाब, किसान के घर और ग्रामीण युवाओं के सपनों से जोड़ने की एक गंभीर और सार्थक कोशिश है।
1 फरवरी को सुबह 9 बजे से होने वाला यह सीधा प्रसारण केवल संख्याओं की जुगलबंदी नहीं, बल्कि उस बहस का मंच होगा जहाँ यह तय करने की कोशिश होगी कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ – हमारे किसान – इस बजट से किस हद तक मज़बूत और सुरक्षित होते हैं।
इस यात्रा में वरिष्ठ पत्रकार और कम्युनिकेशन एक्सपर्ट डॉ. अंकित पांडेय सहित पैनल के तमाम विशेषज्ञ अपनी–अपनी दृष्टि, अनुभव और शोध के आधार पर ऐसे सवाल उठाएँगे जो न सिर्फ़ आज, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भी नीति–निर्माताओं और समाज दोनों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
किसानों, जल–सुरक्षा और टिकाऊ कृषि–विकास पर केंद्रित यह विशेष कार्यक्रम इस बात की याद भी दिलाएगा कि ‘‘अच्छा बजट’’ केवल वही नहीं होता जिसमें आँकड़े संतुलित हों, बल्कि वह भी होता है जो सबसे कमजोर और सबसे ज़रूरी वर्ग – यानी किसान और ग्रामीण समुदाय – के जीवन में वास्तविक सुधार की रोशनी लेकर आए।
नीति और योजनाएं
यूजीसी ने हाल ही में फर्जी विश्वविद्यालयों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की, इस संस्थान में दाखिला न लें
यूजीसी ने हाल ही में फर्जी विश्वविद्यालयों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है, खासकर राजस्थान के अलवर में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को फर्जी घोषित किया गया है। छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि दाखिला लेने से पहले संस्थान की मान्यता जरूर जांचें, क्योंकि इनसे मिली डिग्रियां नौकरी या आगे की पढ़ाई के लिए अमान्य होंगी।
फर्जी संस्थान की जानकारी
राजस्थान के अलवर स्थित यह संस्थान यूजीसी अधिनियम की धारा 2(f) और 3 के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है। फरवरी 2026 में भी इस पर नोटिस जारी हो चुका था, और अब मार्च 2026 में दोबारा चेतावनी दी गई है।
अन्य फर्जी विश्वविद्यालय
देशभर में 32 से अधिक फर्जी विश्वविद्यालय चिह्नित किए गए हैं, जिनमें दिल्ली में सबसे ज्यादा (12), यूपी में 4, और महाराष्ट्र में नेशनल बैकवर्ड कृषि विद्यापीठ शामिल है। कर्नाटक, झारखंड और हरियाणा जैसे राज्यों में भी नए फर्जी संस्थान सामने आए हैं।
जांच कैसे करें
- यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट (ugc.gov.in) पर फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची देखें।
- दाखिला लेने से पहले संस्थान की मान्यता की पुष्टि करें, ताकि समय, पैसा और करियर बर्बाद न हो।
करियर गाइडेंस
NTPC में Artisan Trainee पदों पर भर्ती शुरू, जानें आवेदन का तरीका
एनटीपीसी ने आर्टिसन ट्रेनी (Artisan Trainee) पदों पर भर्ती शुरू की है, जिसमें कुल 27 रिक्तियां हैं। आवेदन 16 मार्च 2026 से खुले हैं और 11 अप्रैल 2026 तक ऑनलाइन किए जा सकते हैं।
योग्यता
- शैक्षिक योग्यता: मैट्रिक (10वीं) पास और संबंधित ट्रेड में आईटीआई।
- ट्रेड्स: फिटर, इलेक्ट्रीशियन, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक/इलेक्ट्रॉनिक्स, मटेरियल स्टोर कीपर।
- आयु सीमा: 18-40 वर्ष।
- लोकेशन: मुख्य रूप से NTPC कुडगी सुपर थर्मल पावर स्टेशन।
आवेदन प्रक्रिया
- आधिकारिक वेबसाइट careers.ntpc.co.in पर जाएं।
- ‘Careers’ सेक्शन में Artisan Trainee लिंक चुनें, रजिस्टर करें और फॉर्म भरें।
- कोई आवेदन शुल्क नहीं; दस्तावेज अपलोड करें और सबमिट करें। अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं होंगे।
चयन प्रक्रिया
चयन लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट के आधार पर होगा, जो जून 2026 में संभावित है। आधिकारिक अधिसूचना डाउनलोड कर विस्तृत जानकारी लें।
नीति और योजनाएं
गूगल-अमेजन समेत टॉप-5 टेक कंपनियां फ्री करवा रहीं AI की पढ़ाई
टॉप टेक कंपनियां जैसे गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट आदि AI की फ्री ट्रेनिंग दे रही हैं, जो शुरुआती से एडवांस्ड लेवल तक उपलब्ध हैं। ये कोर्स सर्टिफिकेट के साथ आते हैं और करियर ग्रोथ में मददगार साबित हो सकते हैं।
गूगल
गूगल का ‘ग्रो विद गूगल’ प्रोग्राम जनरेटिव AI और वर्कप्लेस में AI यूज पर फोकस करता है। बिगिनर्स के लिए आइडियल, लिंक: grow.google/ai।
माइक्रोसॉफ्ट
माइक्रोसॉफ्ट लर्न पर AI, मशीन लर्निंग और क्लाउड AI कोर्स उपलब्ध हैं। कोई प्रोग्रामिंग बैकग्राउंड जरूरी नहीं। लिंक: learn.microsoft.com/training।
अमेजन (AWS)
AWS स्किल बिल्डर पर AI-ML कोर्स क्लाउड एनवायरनमेंट में डेवलपमेंट सिखाते हैं। जेनरेटिव AI स्कॉलरशिप भी मिल सकती है। लिंक: skillbuilder.aws।
अन्य कंपनियां
निविया, ओपनAI और IBM जैसे प्लेटफॉर्म्स भी फ्री AI मॉड्यूल्स ऑफर करते हैं, जैसे DeepLearning.AI के फंडामेंटल्स। ये कोर्सेस 2026 में अपडेटेड हैं।
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