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नीति और योजनाएं

छात्रों के लिए सुनहरा मौका, वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड नीट की तैयारी मुफ्त कराने का बड़ा फैसला

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श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने कटरा और आसपास के क्षेत्रों के छात्रों के लिए मुफ्त NEET कोचिंग शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मेडिकल क्षेत्र में डॉक्टर बनने का बेहतर अवसर प्रदान करेगी।​

कोचिंग की मुख्य विशेषताएं

  • कटरा और आसपास के इलाकों के छात्रों के लिए पूरी तरह मुफ्त NEET तैयारी सेंटर।
  • आधुनिक सुविधाओं से लैस सेंटर, अनुभवी शिक्षकों द्वारा पढ़ाई और मार्गदर्शन।​
  • जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता वाली बोर्ड बैठक में मंजूर।​

अन्य महत्वपूर्ण फैसले

श्राइन बोर्ड ने यात्रियों के लिए बीमा राशि को 10 लाख रुपये तक बढ़ा दिया है। इससे दुर्घटना में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।
यह कदम शिक्षा को धार्मिक सेवा से जोड़ते हुए स्थानीय युवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में है।

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करियर गाइडेंस

NASA समर इंटर्नशिप 2026 प्रोग्राम में छात्रों को मिलेगा स्पेस मिशन पर काम करने का शानदार मौका

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NASA का समर इंटर्नशिप 2026 प्रोग्राम कॉलेज छात्रों को स्पेस मिशन, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और टेक्नोलॉजी पर काम करने का शानदार मौका देता है। यह पेड इंटर्नशिप है, जहां चुने गए छात्र वैज्ञानिकों व इंजीनियरों के साथ असली प्रोजेक्ट्स पर योगदान दे सकते हैं।

पात्रता मानदंड

  • न्यूनतम उम्र 16 वर्ष और GPA कम से कम 3.0 होना जरूरी।​
  • STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) बैकग्राउंड वालों को प्राथमिकता, लेकिन अन्य क्षेत्रों के छात्र भी पैशन दिखाने पर अप्लाई कर सकते हैं।
  • कॉलेज/यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्र, रिसर्च या प्रोजेक्ट्स का अनुभव फायदेमंद।​

आवेदन प्रक्रिया

  • NASA की आधिकारिक वेबसाइट intern.nasa.gov पर रजिस्टर करें और ऑनलाइन फॉर्म भरें।​
  • पर्सनल स्टेटमेंट, एकेडमिक रिकॉर्ड, प्रोजेक्ट्स/अवार्ड्स और रिकमेंडेशन जमा करें।
  • आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन; सिलेक्शन में स्किल्स, पैशन और सॉफ्ट स्किल्स पर जोर।​

महत्वपूर्ण तिथियां

समर 2026 के लिए अंतिम तिथि 27 फरवरी 2026, रात 11:59 बजे ET (भारतीय समयानुसार 28 फरवरी सुबह)।

फायदे

  • रियल स्पेस मिशन पर काम, मेंटरशिप और स्टाइपेंड।
  • फुल-टाइम/पार्ट-टाइम विकल्प, करियर बूस्ट के लिए आइडियल।
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करियर गाइडेंस

UNICEF में सुनहरा मौका , पेड इंटर्नशिप के लिए निकली वैकेंसी, जानिए कैसे करें अप्लाई

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UNICEF ने 2026 के लिए पेड इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें छात्रों और हाल के ग्रेजुएट्स को मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन, एजुकेशन, हेल्थ और चाइल्ड प्रोटेक्शन जैसे क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा। यह 6-26 हफ्तों की फुल-टाइम या पार्ट-टाइम ऑपर्चुनिटी है, जिसमें मासिक स्टाइपेंड (USD 1,700 तक, लगभग ₹1.5 लाख) और ट्रैवल सपोर्ट मिलता है।

योग्यता मानदंड

  • कम से कम 18 वर्ष आयु।
  • अंडरग्रेजुएट/पोस्टग्रेजुएट/PhD छात्र या पिछले 3 वर्षों में ग्रेजुएट।
  • एजुकेशन, सोशल साइंस, स्टैटिस्टिक्स या M&E में बैकग्राउंड; Excel/R/STATA का ज्ञान फायदेमंद।
  • इंग्लिश में प्रवीणता (फ्रेंच/स्पैनिश अतिरिक्त लाभ)।

आवेदन प्रक्रिया

UNICEF Careers पोर्टल (jobs.unicef.org) पर जाकर उपलब्ध वैकेंसीज चेक करें, जैसे जॉब नंबर 588321 (M&E इंटर्नशिप)। CV, कवर लेटर और ट्रांसक्रिप्ट अपलोड करें; कुछ मामलों में दिसंबर 2025 तक डेडलाइन थी, लेकिन नए रोस्टर के लिए चेक करें। वीजा/परमिट खुद व्यवस्थित करने पड़ सकते हैं।

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नीति और योजनाएं

कृषि बजट पर डीडी किसान की नौ घंटे की महा कवरेज, विशेषज्ञ पैनल ने किसानों की उम्मीदों पर रखी बात

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एक फरवरी को डीडी किसान चैनल ने आम बजट 2026–27 से पहले किसानों की उम्मीदों और कृषि अर्थव्यवस्था पर उसके संभावित असर को केंद्र में रखते हुए नौ घंटे की विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया। इस महा कवरेज में सुबह 9 से 11 बजे, फिर 2 से 3, 3 से 4, 4 से 5 और 5 से 6 बजे तक अलग-अलग सत्रों में सरकार, संस्थानों और उद्योग जगत से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।

डीडी किसान की इस विशेष प्रस्तुति का उद्देश्य बजट में कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य, डेयरी और एग्री–बिजनेस से जुड़े प्रावधानों पर गहराई से चर्चा करना और किसानों, उत्पादक कंपनियों एवं सहकारी संस्थाओं की अपेक्षाओं को सामने लाना था। चैनल ने पूरे दिन अलग-अलग सत्रों में नीति–निर्माताओं, वैज्ञानिकों, वित्त विशेषज्ञों और जमीनी स्तर पर काम कर रहे हितधारकों को एक मंच पर लाकर कृषक समुदाय के दृष्टिकोण से बजट को समझने की कोशिश की।

सुबह के पहले सत्र में एंकर मोनालिसा की मेजबानी में मीडिया, कृषि अर्थशास्त्र, कमोडिटी और मत्स्य–कृषि से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अंकित कुमार ने शुरुआती चर्चा में यह सवाल उठाया कि क्या बजट में कृषि को केवल कल्याण के नज़रिए से देखा जाएगा या इसे समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोज़गार सृजन के इंजन के रूप में समझा जाएगा।

राष्ट्रीय कृषि आर्थिक नीति एवं अनुसंधान संस्थान के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. खे्म चंद ने कृषि पर सरकारी निवेश, न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल विविधीकरण और जलवायु–स्मार्ट खेती के लिए वित्तीय प्रावधानों पर संभावित रुझानों की ओर इशारा किया। कमोडिटी विशेषज्ञ रूपा मेहता ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार, कीमतों में उतार–चढ़ाव और फ्यूचर मार्केट के संदर्भ में यह चर्चा की कि बजट के ज़रिये किसानों को बेहतर मूल्य सुरक्षा कैसे दी जा सकती है।

मत्स्य पालन से जुड़े किसान प्रतिनिधि श्री रजनीश कुमार ने फिशरी सेक्टर के लिए बुनियादी ढांचे, कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण इकाइयों और बाज़ार तक सुगम पहुंच के लिए अलग से बजटीय प्रावधान की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्रों के साथ–साथ अंतर्देशीय मत्स्यपालन को भी नीति–निर्माण में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

दूसरे सत्र में एंकर अंजू सिंह के साथ वित्त, उर्वरक, ग्रामीण बैंकिंग और कृषि–रसायन क्षेत्र के बड़े नाम जुड़े। वस्त्र मंत्रालय के विशेष सचिव एवं वित्तीय सलाहकार श्री असीत गोपाल ने चर्चा में बताया कि बजट में पूंजीगत व्यय, ग्रामीण उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने वाले प्रावधान ग्रामीण मांग को मज़बूती दे सकते हैं, जिसका सकारात्मक असर किसानों की आय पर भी पड़ेगा।

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इफ्को के प्रबंध निदेशक श्री योगेन्द्र कुमार ने उर्वरक सब्सिडी, पोषक–तत्व आधारित सब्सिडी, नैनो–यूरिया जैसी तकनीकों और इनपुट कॉस्ट कम करने के प्रयासों को बजट की अहम दिशा बताया। नाबार्ड के सीजीएम और बीआईआरडी के निदेशक डॉ. निरुपम मेहरोत्रा ने सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए सस्ती दर पर ऋण, कृषि अवसंरचना कोष और ग्रामीण क्रेडिट फ्लो की चुनौतियों पर विस्तार से विचार रखे।

बेस्ट एग्रो लाइफ लिमिटेड के निदेशक श्री सारा नरसैह ने कीट प्रबंधन, फसल सुरक्षा और जिम्मेदार कीटनाशक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि बजट में शोध एवं विकास, रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए अलग से प्रोत्साहन किसान हित में होगा।

तीसरे सत्र में एंकर पुलकित शुक्ला के साथ बीमा, कृषि मशीनरी और पशुपालन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। पीएम फसल बीमा योजना (PMFBY) और एआईसी से जुड़ी अतिरिक्त आयुक्त डॉ. कमना प्रसाद ने फसल बीमा के दायरे, प्रीमियम, क्लेम निपटान और प्रौद्योगिकी–आधारित आकलन पर चर्चा करते हुए उम्मीद जताई कि बजट में टेक्नोलॉजी–चालित बीमा मॉडल को और गति दी जाएगी।

कृषि मंत्रालय में मशीनरी के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. वी. एन. काले ने यंत्रीकरण, ड्रोन, कस्टम हायरिंग सेंटर और छोटे किसानों के लिए अनुकूल मशीनों के विकास की ज़रूरत पर जोर दिया। पशुपालन मंत्रालय के संयुक्त आयुक्त डॉ. अधिराज मिश्रा ने डेयरी, पशु–स्वास्थ्य, टीकाकरण और नस्ल सुधार कार्यक्रमों के लिए बजट में अपेक्षित प्रावधानों को रेखांकित करते हुए कहा कि पशुपालन सेक्टर ग्रामीण आय का अहम स्तंभ बन चुका है।

चौथे सत्र में एंकर हेदार ज़ैदी के साथ केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और आईसीएआर के प्रतिनिधि शामिल हुए। कृषि मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहरडा ने फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और कृषि–जलवायु–क्षेत्र आधारित योजनाओं को बजट की प्राथमिकता में शामिल किए जाने की ज़रूरत पर बात की।

मत्स्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने नीली अर्थव्यवस्था, मत्स्य पालन अवसंरचना विकास, मछुआरों के सामाजिक सुरक्षा कवच और निर्यात क्षमता पर आधारित योजनाओं पर प्रकाश डाला। आईसीएआर के डीडीजी (फसल) डॉ. एस. के. सिंह ने बीज अनुसंधान, उच्च उत्पादक किस्में, जलवायु–सहिष्णु प्रजाति और कृषि–अनुसंधान पर बजट आवंटन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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कॉरपोरेशन मंत्रालय में निदेशक और आईएएस अधिकारी श्री कपिल मीणा ने सहकारी समितियों, बहु–राज्य सहकारी संस्थाओं और नये युग के सहकारी ढांचे को मज़बूत करने के लिए नीतिगत और वित्तीय प्रावधानों की रूपरेखा पर चर्चा की। आईसीएआर के एडीजी (आईसीटी) डॉ. अनिल राय ने डिजिटल एग्रीकल्चर, डेटा–आधारित निर्णय, एआई, रिमोट सेंसिंग और किसान–पोर्टल के ज़रिये ज्ञान के प्रसार जैसी पहलों को विस्तार से समझाया।

अंतिम सत्र में एंकर सुरेश मांचंदा ने मक्का, एनाफेड, किराना और ड्रायफ्रूट सेक्टर के विशेषज्ञों के साथ चर्चा को आगे बढ़ाया। आईसीएआर के पूर्व निदेशक (मक्का) डॉ. साई दास ने मक्का के बढ़ते औद्योगिक उपयोग, एथनॉल ब्लेंडिंग, पशु–चारे और प्रोसेस्ड फूड में इसकी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि बजट में मक्का–आधारित वैल्यू–चेन को प्रोत्साहन कृषि–अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक होगा।

एनाफेड के पूर्व प्रबंध निदेशक डॉ. सुनील कुमार सिंह ने बाज़ार हस्तक्षेप, बफर स्टॉक, मूल्य–स्थिरीकरण और किसानों से सीधे खरीद की नीतियों पर प्रकाश डाला। किराना समिति के महासचिव श्री धीरज सिधवानी ने खुदरा व्यापार, थोक–खरीद, जीएसटी और सप्लाई–चेन से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि बजट में किराना व्यापारियों और छोटे खुदरा विक्रेताओं को रियायतें मिलने पर उसका सीधा असर किसानों की बिक्री और मांग पर पड़ेगा।

ड्रायफ्रूट काउंसिल के सीईओ श्री नितिन सहगल ने आयात–शुल्क, गुणवत्ता मानक, प्रोसेसिंग और मूल्य–वृद्धि के माध्यम से किसानों को ड्रायफ्रूट और बागवानी सेक्टर से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।

पूरे दिन चली इस नौ घंटे की महा कवरेज के ज़रिये डीडी किसान ने बजट को केवल आंकड़ों की कवायद के बजाय खेत, खलिहान, तालाब, डेयरी, सहकारिता और बाज़ार से जोड़कर देखने की कोशिश की। किसानों की आमदनी, ग्रामीण रोज़गार, कृषि–ढांचा, बीमा, क्रेडिट, तकनीक और बाज़ार—इन सभी पर केंद्रित सवालों के बीच विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि बजट 2026–27 कृषि क्षेत्र को मज़बूत बनाने के साथ–साथ किसानों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार की दिशा दिखाएगा।

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