मैगज़ीन
अश्विनी वैष्णव ने मुंबई में पहले आईआईसीटी परिसर का किया शुभारंभ
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई में भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) के पहले परिसर का शुक्रवार, 18 जुलाई 2025 को उद्घाटन किया। यह परिसर राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) में स्थापित किया गया है। इस अवसर पर वैष्णव ने कहा कि आईआईसीटी की तर्ज पर भविष्य में देशभर में ऐसे और संस्थान बनाए जाएंगे, ठीक वैसे ही जैसे आईआईटी और आईआईएम देश में स्थापित किए गए हैं।
उद्देश्य और फोकस:
- IICT का मुख्य उद्देश्य युवाओं को VFX, गेमिंग, एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) जैसे उभरते क्षेत्रों में उद्योग उन्मुख प्रशिक्षण देना है।
- संस्थान ने गूगल, मेटा, एनवीआईडीआईए, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, एडोब, डब्ल्यूपीपी जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने के लिए साझेदारी की है, ताकि छात्रों को सीधे उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जा सके।
भविष्य की योजनाएं:
- मंत्री ने बताया कि अगला IICT परिसर मुंबई के फिल्म सिटी में बनेगा, जिसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने 400 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और जमीन भी आवंटित कर दी है। यह परिसर देश के सबसे एडवांस परिसरों में शामिल होगा और इसकी डिज़ाइन अगले कुछ महीनों में पूरी होने की उम्मीद है।
- सरकार ने देशभर में कई और IICT संस्थान खोलने की भी योजना बनाई है। दूसरे चरण के तहत गोरेगांव (फिल्म सिटी) में 10 एकड़ क्षेत्र में एक बड़ा परिसर बनेगा।
प्रारंभिक क्षमता और सहायता:
- संस्थान अपने पहले साल में लगभग 300 छात्रों और प्रशिक्षकों को VFX, एनीमेशन, पोस्ट-प्रोडक्शन, गेमिंग, XR जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देगा।
- महाराष्ट्र सरकार ने “वेव्स” पहल व रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 150 करोड़ रुपये के विशेष फंड की भी घोषणा की है।
सुविधाएं:
- मुंबई के पेडर रोड पर IICT की इमारत में उन्नत सुविधाएं जैसे गेमिंग लैब, एनिमेशन लैब, एडिट-साउंड सूट, वर्चुअल प्रोडक्शन सेट-अप, इमर्सिव स्टूडियो, प्रीव्यू थिएटर, स्मार्ट क्लासरूम्स उपलब्ध हैं।
मुख्य वक्तव्य:
“आईआईटी और आईआईएम की तरह भविष्य में और अधिक आईआईसीटी संस्थान बनाए जाएंगे। यह देश के युवाओं और अवसरों के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है।” — अश्विनी वैष्णव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई को क्रिएटिव इंडस्ट्री की नई वैश्विक राजधानी बनाने की भी घोषणा की है और बताया कि वेव्स इंडेक्स के मुताबिक महाराष्ट्र में रचनात्मक अर्थव्यवस्था क्षेत्र का संयुक्त मूल्यांकन अब 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
ब्रेकिंग न्यूज़
जावर उपवहन परियोजना से बदलेगा कृषि परिदृश्य, 26 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य
खंडवा (मध्यप्रदेश)।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित जावर सूक्ष्म सिंचाई (उपवहन) परियोजना क्षेत्र में आधुनिक कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। इस परियोजना के तहत 26,128 हेक्टेयर क्षेत्र और 52 गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना को दो प्रमुख पंप हाउस और चार क्षेत्रों में विभाजित कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है।

पंप हाउस-1 (सुरवाड़िया) क्षेत्र 5639 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जहां नवंबर से सिंचाई कार्य प्रारंभ किया गया था। शिवना, देवाक्षिरी और सावरिया तालाब सहित कई नालों में पानी छोड़कर वर्तमान में लगभग 2500 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित किया जा रहा है। शेष क्षेत्र को 15 मई तक कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पंप हाउस-2 (जावर) को तीन भागों—क्षेत्र 2, 3 और 4—में विभाजित किया गया है।
• क्षेत्र-2 (3963 हेक्टेयर) में नवंबर से कार्य शुरू हुआ, जहां रोहिणी तालाब और अन्य नालों के माध्यम से करीब 2000 हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है।
• क्षेत्र-3 (10955 हेक्टेयर) में जनवरी से कार्य प्रारंभ हुआ, जहां फिलहाल 1000 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो रहा है। कुछ तकनीकी व क्षेत्रीय बाधाओं के बावजूद इसे 30 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

• क्षेत्र-4 (5571 हेक्टेयर) में बल्दी, मुदवाड़ा, बढ़िया और अन्य नालों के माध्यम से लगभग 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। इसे 30 मई तक पूर्ण करने की योजना है।
परियोजना के अंतर्गत 30 जून तक संपूर्ण कार्य पूर्ण कर अगले सिंचाई सीजन तक 100% क्षेत्र को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है। पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए प्राइमरी फिल्ट्रेशन सिस्टम भी स्थापित किया जा रहा है।
प्राधिकरण द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे परियोजना के दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रत्येक 20 हेक्टेयर पर स्थापित OMS पेटियों में चार आउटलेट दिए गए हैं, जिनका उपयोग बारी-बारी से किया जाना आवश्यक है। एक समय में केवल दो आउटलेट संचालित करने से सभी किसानों को समान रूप से पानी मिल सकेगा।
यह परियोजना विशेष रूप से ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के लिए डिजाइन की गई है, जिससे जल संरक्षण के साथ उत्पादन और आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके। किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने और अवैध जल उपयोग से बचने की सलाह दी गई है।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की यह पहल खंडवा जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
नीति और योजनाएं
गूगल-अमेजन समेत टॉप-5 टेक कंपनियां फ्री करवा रहीं AI की पढ़ाई
टॉप टेक कंपनियां जैसे गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट आदि AI की फ्री ट्रेनिंग दे रही हैं, जो शुरुआती से एडवांस्ड लेवल तक उपलब्ध हैं। ये कोर्स सर्टिफिकेट के साथ आते हैं और करियर ग्रोथ में मददगार साबित हो सकते हैं।
गूगल
गूगल का ‘ग्रो विद गूगल’ प्रोग्राम जनरेटिव AI और वर्कप्लेस में AI यूज पर फोकस करता है। बिगिनर्स के लिए आइडियल, लिंक: grow.google/ai।
माइक्रोसॉफ्ट
माइक्रोसॉफ्ट लर्न पर AI, मशीन लर्निंग और क्लाउड AI कोर्स उपलब्ध हैं। कोई प्रोग्रामिंग बैकग्राउंड जरूरी नहीं। लिंक: learn.microsoft.com/training।
अमेजन (AWS)
AWS स्किल बिल्डर पर AI-ML कोर्स क्लाउड एनवायरनमेंट में डेवलपमेंट सिखाते हैं। जेनरेटिव AI स्कॉलरशिप भी मिल सकती है। लिंक: skillbuilder.aws।
अन्य कंपनियां
निविया, ओपनAI और IBM जैसे प्लेटफॉर्म्स भी फ्री AI मॉड्यूल्स ऑफर करते हैं, जैसे DeepLearning.AI के फंडामेंटल्स। ये कोर्सेस 2026 में अपडेटेड हैं।
ब्रेकिंग न्यूज़
आईआईटी दिल्ली में “समर रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम (SRFP)” शुरू, हफ्ते के हिसाब से मिलेंगे पैसे
आईआईटी दिल्ली ने 2026 के लिए एक 2 महीने (लगभग 8 सप्ताह) की “समर रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम (SRFP)” शुरू की है, जिसमें चयनित छात्रों को हफ्ते के हिसाब से स्टाइपेंड दिया जाएगा और उन्हें आईआईटी कैंपस में रहने‑रिसर्च करने का भी मौका मिलेगा।
फेलोशिप की अवधि और पैसे
- फेलोशिप आमतौर पर 13 मई 2026 से 13 जुलाई 2026 तक चलती है, यानी लगभग 2 महीने या 8–10 सप्ताह की अवधि।
- चयनित छात्रों को प्रति सप्ताह 2000 रुपये की स्टाइपेंड दी जाती है; यानी 8 सप्ताह में कुल लगभग 16,000 रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
किसके लिए मौका है?
- यह फेलोशिप BE/B.Tech, ME/M.Tech जैसे इंजीनियरिंग और तकनीकी कोर्स में अध्ययनरत छात्रों के लिए है, जो गर्मियों की छुट्टियों में आईआईटी दिल्ली की फैकल्टी के मार्गदर्शन में रिसर्च प्रोजेक्ट करना चाहते हैं।
- आमतौर पर उम्मीदवार को अपने संस्थान में शीर्ष रैंक वाला होना चाहिए और आईआईटी दिल्ली का छात्र नहीं होना चाहिए।
क्या‑क्या सुविधाएँ मिलती हैं?
- निःशुल्क आवास और भोजन: चयनित छात्रों को आईआईटी दिल्ली के हॉस्टल में रहने और भोजन की सुविधा दी जाती है।
- यात्रा भत्ता: देश‑भर के चयनित छात्रों को ट्रेन (स्लीपर क्लास) किराये का रिफंड या अनुदान मिलता है।
- रिसर्च और सर्टिफिकेट: फैलोशिप के दौरान छात्र आधुनिक लैब में रिसर्च प्रोजेक्ट करते हैं और प्रोग्राम सफलतापूर्वक पूरा करने पर आईआईटी दिल्ली से रिसर्च सर्टिफिकेट मिलता है, जो आगे की ग्रेजुएशन या जॉब के लिए फायदेमंद रहता है।
आवेदन की तारीखें और लिंक
- आवेदन शुरू: 16 मार्च 2026
- अंतिम तिथि: 3 अप्रैल 2026 (शाम 5 बजे तक)
- चयन सूची: मई 2026 के पहले सप्ताह में आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगी।
- आवेदन करने के लिए: आईआईटी दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट और उसके एडमिशन/फेलोशिप पोर्टल पर जाकर Summer Research Fellowship Programme 2026 के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।
अगर आप B.Tech/BE के किस वर्ष में हैं और किस ब्रांच (CSE, Electronics, Civil, Mechanical आदि) से हैं, तो बता दें; तो यह भी बता सकता हूँ कि आपके लिए इस फेलोशिप के लिए कैसी रिसर्च‑प्रोजेक्ट प्रोफाइल बनाना फायदेमंद रहेगा।
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