स्टूडेंट वॉइस
शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर सैकड़ों युवा सड़कों पर उतरे, 1.20 लाख पदों की बहाली और आयु सीमा में छूट की प्रमुख मांगें उठाई
पटना में BPSC TRE-4 शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर सैकड़ों युवा सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने 1.20 लाख पदों की बहाली और आयु सीमा में छूट की प्रमुख मांगें उठाई हैं।
प्रदर्शन के कारण
अभ्यर्थी सरकार के वादों से निराश हैं, क्योंकि पहले 1 लाख से अधिक पदों का ऐलान हुआ था जो घटकर 44,000 रह गया। TRE-4 नोटिफिकेशन मार्च 2026 में आने की बात कही गई, लेकिन देरी से उम्र सीमा पार होने का डर है।
पटना कॉलेज से JP गोलंबर तक मार्च निकाला गया, पुलिस से धक्का-मुक्की हुई।
मुख्य मांगें
- TRE-4 में कम से कम 1.20 लाख रिक्तियां घोषित हों।
- आयु सीमा में छूट दी जाए, ताकि लंबे इंतजार वाले अभ्यर्थी बाहर न हों।
- नोटिफिकेशन तुरंत जारी हो, पिछले 3 चरणों में 2.27 लाख नियुक्तियां हो चुकी हैं।
सरकार का रुख
नीतीश सरकार ने 44,000+ पदों की घोषणा की है, लेकिन प्रदर्शन के बाद पद बढ़ाने पर विचार हो सकता है। पहले STET की मांग पर भी इसी तरह हंगामा हुआ था।
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यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती (69000 Shikshak Bharti) को लेकर एक बार फिर बेरोजगार अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे
यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती (69000 Shikshak Bharti) को लेकर एक बार फिर बेरोजगार अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं। 18-19 अगस्त 2025 को लखनऊ में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया। पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों को जबरन इको गार्डन मैदान तक पहुंचाया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक अपनी मांग रख रहे थे, लेकिन पुलिस ने बलपूर्वक धरना हटवाया.
मुख्य कारण और अभ्यर्थियों की मांग
- अभ्यर्थियों का आरोप है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में गंभीर आरक्षण अनियमितताएँ हुई हैं। OBC को 27% के बजाय केवल 3.86%, SC को 21% के बजाय 16.2% आरक्षण दिया गया। इससे हजारों आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए.
- हाई कोर्ट डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को तीन महीने के भीतर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने आदेश का पालन नहीं किया। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, और वहां भी बार-बार सुनवाई टल रही है।
- अभ्यर्थी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी मजबूती से पैरवी की जाए और जल्द निष्पादन कराया जाए.
- प्रदर्शनकारी नेताओं—जैसे अमरेंद्र पटेल, सुषील कश्यप, और भास्कर सिंह—का कहना है कि अगर न्याय नहीं मिला तो हर दिन लखनऊ में धरना देंगे और भाजपा नेताओं के घरों का भी घेराव जारी रहेगा.
विपक्ष और स्थिति
- प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बसों से इको गार्डन पहुंचाया, जहां अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन जारी रखा।
- शिक्षा निदेशालय पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो सके.
- सरकार का कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और वे अदालत के आदेश का पालन करेंगे.
विश्वविद्यालय प्रोफाइल
DU छात्र संघ चुनाव के लिए शेड्यूल जारी, वोटिंग के अगले दिन ही होगी काउंटिंग
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 के लिए शेड्यूल जारी कर दिया गया है। इस बार चुनाव की तारीखें और प्रक्रिया इस प्रकार है:
मतदान और मतगणना
- चुनाव में वोटिंग की तारीख: 18 सितंबर 2025
- मतगणना की तारीख: 19 सितंबर 2025 (वोटिंग के अगले दिन ही मतगणना होगी और इसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे).
अन्य महत्वपूर्ण बातें
- नामांकन की अंतिम तिथि: 10 सितंबर 2025, दोपहर 3 बजे तक
- नामांकन के साथ ₹1 लाख का बॉन्ड और ₹500 का मांग पत्र जमा करना अनिवार्य होगा.
- मतदान सुबह 8:30 से दोपहर 1 बजे (मॉर्निंग क्लासेज) और 3 बजे से शाम 7:30 बजे (ईवनिंग क्लासेज) के लिए होगा.
- चुनाव प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता, सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट के आदेश और दिल्ली संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 2007 के निर्देशों का पालन किया जाएगा.
स्टूडेंट वॉइस
माखनलाल विश्वविद्यालय में छात्रों की सुरक्षा पर संकट, बसों में क्षमता से अधिक भर रहे यात्री
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में छात्रों की आवाजाही के लिए शुरू की गई मुफ्त बस सेवा में गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ दिन पहले ही विद्यार्थियों को सुविधा देने के लिए बस सेवा की शुरुआत की थी, लेकिन मात्र दो बसों का संचालन किया जा रहा है, जो कि छात्रों की संख्या के हिसाब से बिल्कुल अपर्याप्त है।
आवागमन करने वाले छात्रों का कहना है कि बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक छात्रों को भरा जा रहा है। स्थिति यह है कि अंदर खड़े होने की जगह भी नहीं बचती और कई छात्र मजबूरी में गेट पर लटककर सफर कर रहे हैं, जो उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि यह न सिर्फ सड़क परिवहन नियमों का उल्लंघन है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन की सीधी लापरवाही भी है। विशेष बात यह है कि यही विश्वविद्यालय पत्रकारिता की पढ़ाई और समाज में गलत स्थितियों को उजागर करने के लिए जाना जाता है, लेकिन अपने ही परिसर में हो रहे इस नियम उल्लंघन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है।
छात्रों की मांग है कि बसों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। छात्रों ने चेतावनी दी कि फिलहाल रक्षाबंधन की छुट्टियों के कारण बसों में भीड़ कुछ कम है, लेकिन विद्यार्थियों के लौटने के बाद स्थिति और भी बिगड़ जाएगी।
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