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UP में 5 हजार स्कूल बंद करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 5,000 सरकारी स्कूलों को बंद (मर्ज) करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। यह फैसला उन स्कूलों पर लागू किया गया है जहाँ छात्र संख्या 70 या उससे कम है। सरकार का तर्क है कि इससे शिक्षा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
- सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें कहा गया है कि इस फैसले से राज्य के लगभग 3.5 लाख छात्रों को निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा या दूर स्थित स्कूलों में जाना पड़ेगा, जिससे शिक्षा तक उनकी पहुंच बाधित हो सकती है13।
- याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के फैसले को भी चुनौती दी गई है, जिसमें हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को वैध ठहराया था और याचिका खारिज कर दी थी।
- याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से इस संवेदनशील मामले पर शीघ्र सुनवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है, हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सरकार का नीतिगत मामला है।
सरकार का पक्ष
- सरकार का कहना है कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को मर्ज करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी।
- शिक्षा विभाग के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक खर्च कम करने और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया है7।
विरोध और चिंताएँ
- विपक्षी दलों और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा बाधित होगी, क्योंकि उन्हें दूर स्थित स्कूलों में जाना पड़ेगा।
- याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि यह फैसला बच्चों के शिक्षा के अधिकार (अनुच्छेद 21A) और नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, जिसमें 1 किलोमीटर के दायरे में स्कूल होना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट का फैसला
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2025 को सरकार के फैसले को सही ठहराया था और कहा था कि यह नीतिगत निर्णय है तथा इससे बच्चों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।
आगे की स्थिति
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है और जल्द ही इस पर विस्तृत सुनवाई होगी।
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नोएडा लोक मंच (NLM ) इस साल करवाएगा चौथा ड्राइंग कॉम्पिटीशन
नोएडा लोक मंच (NLM) की “चौथी इन्द्रधनुष चित्रकला प्रतियोगिता 2025”, जिसमें इस साल 3,000 से ज्यादा बच्चे भाग लेने वाले हैं।
क्या है यह कॉम्पिटीशन
- यह नोएडा लोक मंच द्वारा आयोजित चौथी इन्द्रधनुष चित्रकला प्रतियोगिता है, जो पिछले तीन साल से लगातार हो रही है और नोएडा की सबसे बड़ी व समावेशी आर्ट प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है।
- इस बार 120 से अधिक स्कूलों से 3000 से ज्यादा बच्चे इसमें हिस्सा लेंगे।
कौन‑कौन भाग ले सकता है
- प्रतियोगिता में निजी और सरकारी स्कूलों के बच्चे, विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, स्लम क्षेत्र के बच्चे और घरेलू सहायिकाओं के बच्चे सभी को शामिल किया जाता है।
- इसका उद्देश्य अधिक से अधिक विविध पृष्ठभूमि के बच्चों को एक साथ मंच देना और कला के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना है।
कब और कहां होगी
- चौथी इन्द्रधनुष 2025 प्रतियोगिता 29 नवंबर को आयोजित होगी।
- स्थान: सेक्टर 33A, नोएडा हाट के पास स्थित शिवालिक चिल्ड्रन पार्क, जहां कार्यक्रम सुबह 9 बजे से शुरू होगा।
पुरस्कार और प्रोत्साहन
- हर 30 बच्चों में कम से कम 1 बच्चे को पुरस्कार देने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को प्रोत्साहन मिल सके।
- कुल लगभग 300 पुरस्कार अलग‑अलग समूहों और श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बच्चों को दिए जाएंगे।
खबर का मतलब आपके वाक्य से
आपके लिखे वाक्य “NLM इस साल करवाएगा चौथा ड्राइंग कॉम्पिटीशन, 3 हजार से ज्यादा बच्चे लेंगे हिस्सा” का सीधा संदर्भ यही है कि नोएडा लोक मंच इस साल चौथी इन्द्रधनुष ड्राइंग/चित्रकला प्रतियोगिता करा रहा है, जिसमें 3000+ बच्चों की भागीदारी तय है और इसका आयोजन 29 नवंबर 2025 को नोएडा में होगा।
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मुकुंद आगीवाल ने सीए फाइनल में मारी बाजी, आइए जानते हैं सफलता की कहानी
मुकुंद आगीवाल, जो मध्य प्रदेश के धार जिले के छोटे से कस्बे धामनोद के रहने वाले हैं, ने सितंबर 2025 के ICAI CA फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर देशभर में नाम रोशन किया है। उन्होंने कुल 600 में से 500 अंक (83.33%) प्राप्त किए, जो एक अद्भुत प्रदर्शन माना जाता है। मुकुंद का परिवार साधारण है; उनके पिता पवन आगीवाल एक छोटी सी स्टेशनरी की दुकान चलाते हैं और उनकी मां गृहिणी हैं।
मुकुंद ने 10वीं क्लास में ही ठाना था कि वे CA बनेंगे, और उनके पिता का भी यही सपना था। घर की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। महामारी के दौरान उन्होंने घर से ही पढ़ाई की, बाद में इंदौर और पुणे में कोचिंग लेकर अध्ययन किया। मुकुंद का कहना है कि सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता, बस ईमानदारी और मेहनत करनी होती है, साथ ही खुद पर विश्वास जरूरी है।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और आत्मविश्वास को दिया है। मुकुंद के इस संघर्ष और सफलता की कहानी छोटे शहरों के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, यह दिखाती है कि समर्पण और मेहनत से कोई भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। मुकुंद ने आगे एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी करने और बाद में अपने कस्बे में व्यापार शुरू करने की योजना बनाई है। उनकी कहानी सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्टता प्राप्ति का उदाहरण है.
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पतंजलि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह, राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों को दी उपाधियां
पतंजलि विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह 2 नवंबर 2025 को हरिद्वार में आयोजित हुआ, जिसमें देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और 1424 छात्रों को उपाधियां प्रदान कीं। इस मौके पर योगगुरु स्वामी रामदेव ने विश्वविद्यालय के छात्रों को जॉब क्रिएटर बताया, यानी वे सिर्फ नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बनने की प्रेरणा रखते हैं।
समारोह की मुख्य बातें
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समारोह में स्नातक, परास्नातक, पीएचडी और डी.लिट उपाधियां बांटी।
- 54 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक दिए गए, जिनमें 64% पुरस्कार छात्राओं को मिले।
- राष्ट्रपति मुर्मू ने बेटियों के योगदान की सराहना की और कहा कि अगर महिलाएं पीछे रहीं तो विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।
- योगगुरु रामदेव ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय का उद्देश्य सिर्फ डिग्री देना नहीं, देश में नैतिक और आत्मनिर्भर नागरिकों का निर्माण करना है।
- कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है और NAAC से ‘ए ग्रेड’ प्राप्त है।
प्रेरणादायी संदेश
- राष्ट्रपति मुर्मू और स्वामी रामदेव दोनों ने छात्र-छात्राओं को समाज के लिए सकारात्मक बदलाव लाने, योग-आध्यात्म और विज्ञान के साथ जीवन में उन्नति करने का संदेश दिया।
- उन्होंने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय अपने वैदिक और आधुनिक शिक्षा के समन्वय से राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है।
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