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संघर्ष और प्रेरणा की कहानी देश भर के युवाओं के लिए मिसाल, भैंस चराने वाली लड़की ने क्रैक कर दिखाया UPSC, और बनी IAS
भैंस चराने वाली लड़की सी वनमथी की संघर्ष और प्रेरणा की कहानी देश भर के युवाओं के लिए मिसाल है। उन्होंने 3 बार असफलता के बाद चौथी बार में UPSC क्रैक करके IAS बनने का सपना पूरा किया.
संघर्ष भरा बचपन और प्रेरणा
- सी वनमथी तमिलनाडु के इरोड जिले के सत्यमंगलम कस्बे में पैदा हुई थीं, उनके पिता टैक्सी ड्राइवर थे और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी.
- स्कूल के बाद वे परिवार की मदद के लिए भैंसें चराती थीं और छोटे-मोटे काम भी करती थीं.
- 12वीं के बाद रिश्तेदारों ने शादी का दबाव बनाया, लेकिन माता-पिता के सपोर्ट से वे पढ़ाई जारी रख सकीं.
टीवी सीरियल और प्रेरणादायक मुलाकात
- वनमथी को IAS बनने की प्रेरणा दो जगहों से मिली—गांव आई महिला कलेक्टर से मुलाकात और टीवी सीरियल ‘गंगा यमुना सरस्वती’ जिसमें नायिका IAS ऑफिसर थी.
- इसी से उनमें सिविल सेवा परीक्षा पास करने का जुनून जागा
परीक्षा में असफलता और सफलता
- पहले प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचीं, दोबारा प्रयास में भी कभी प्रीलिम्स तो कभी मेंस में रह गईं.
- असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी और चौथी बार में 2015 UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 152 हासिल की.
- उनकी इस कामयाबी ने खासकर ग्रामीण और साधारण परिवार की लड़कियों के लिए रास्ता दिखाया.
सबसे खास बातें
- सी वनमथी की कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियाँ और असफलताएँ भी मजबूत इरादों वाले व्यक्ति को रोक नहीं सकतीं
- टीवी सीरियल या रियल-लाइफ रोल मॉडल भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं.
यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और कठिन हालातों के बावजूद बड़ा सपना देखता है और पूरे जुनून से उसे पाने की कोशिश करता है.
ब्रेकिंग न्यूज़
जावर उपवहन परियोजना से बदलेगा कृषि परिदृश्य, 26 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य
खंडवा (मध्यप्रदेश)।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित जावर सूक्ष्म सिंचाई (उपवहन) परियोजना क्षेत्र में आधुनिक कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। इस परियोजना के तहत 26,128 हेक्टेयर क्षेत्र और 52 गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना को दो प्रमुख पंप हाउस और चार क्षेत्रों में विभाजित कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है।

पंप हाउस-1 (सुरवाड़िया) क्षेत्र 5639 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जहां नवंबर से सिंचाई कार्य प्रारंभ किया गया था। शिवना, देवाक्षिरी और सावरिया तालाब सहित कई नालों में पानी छोड़कर वर्तमान में लगभग 2500 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित किया जा रहा है। शेष क्षेत्र को 15 मई तक कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पंप हाउस-2 (जावर) को तीन भागों—क्षेत्र 2, 3 और 4—में विभाजित किया गया है।
• क्षेत्र-2 (3963 हेक्टेयर) में नवंबर से कार्य शुरू हुआ, जहां रोहिणी तालाब और अन्य नालों के माध्यम से करीब 2000 हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है।
• क्षेत्र-3 (10955 हेक्टेयर) में जनवरी से कार्य प्रारंभ हुआ, जहां फिलहाल 1000 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो रहा है। कुछ तकनीकी व क्षेत्रीय बाधाओं के बावजूद इसे 30 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

• क्षेत्र-4 (5571 हेक्टेयर) में बल्दी, मुदवाड़ा, बढ़िया और अन्य नालों के माध्यम से लगभग 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। इसे 30 मई तक पूर्ण करने की योजना है।
परियोजना के अंतर्गत 30 जून तक संपूर्ण कार्य पूर्ण कर अगले सिंचाई सीजन तक 100% क्षेत्र को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है। पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए प्राइमरी फिल्ट्रेशन सिस्टम भी स्थापित किया जा रहा है।
प्राधिकरण द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे परियोजना के दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रत्येक 20 हेक्टेयर पर स्थापित OMS पेटियों में चार आउटलेट दिए गए हैं, जिनका उपयोग बारी-बारी से किया जाना आवश्यक है। एक समय में केवल दो आउटलेट संचालित करने से सभी किसानों को समान रूप से पानी मिल सकेगा।
यह परियोजना विशेष रूप से ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के लिए डिजाइन की गई है, जिससे जल संरक्षण के साथ उत्पादन और आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके। किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने और अवैध जल उपयोग से बचने की सलाह दी गई है।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की यह पहल खंडवा जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
नीति और योजनाएं
गूगल-अमेजन समेत टॉप-5 टेक कंपनियां फ्री करवा रहीं AI की पढ़ाई
टॉप टेक कंपनियां जैसे गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट आदि AI की फ्री ट्रेनिंग दे रही हैं, जो शुरुआती से एडवांस्ड लेवल तक उपलब्ध हैं। ये कोर्स सर्टिफिकेट के साथ आते हैं और करियर ग्रोथ में मददगार साबित हो सकते हैं।
गूगल
गूगल का ‘ग्रो विद गूगल’ प्रोग्राम जनरेटिव AI और वर्कप्लेस में AI यूज पर फोकस करता है। बिगिनर्स के लिए आइडियल, लिंक: grow.google/ai।
माइक्रोसॉफ्ट
माइक्रोसॉफ्ट लर्न पर AI, मशीन लर्निंग और क्लाउड AI कोर्स उपलब्ध हैं। कोई प्रोग्रामिंग बैकग्राउंड जरूरी नहीं। लिंक: learn.microsoft.com/training।
अमेजन (AWS)
AWS स्किल बिल्डर पर AI-ML कोर्स क्लाउड एनवायरनमेंट में डेवलपमेंट सिखाते हैं। जेनरेटिव AI स्कॉलरशिप भी मिल सकती है। लिंक: skillbuilder.aws।
अन्य कंपनियां
निविया, ओपनAI और IBM जैसे प्लेटफॉर्म्स भी फ्री AI मॉड्यूल्स ऑफर करते हैं, जैसे DeepLearning.AI के फंडामेंटल्स। ये कोर्सेस 2026 में अपडेटेड हैं।
ब्रेकिंग न्यूज़
आईआईटी दिल्ली में “समर रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम (SRFP)” शुरू, हफ्ते के हिसाब से मिलेंगे पैसे
आईआईटी दिल्ली ने 2026 के लिए एक 2 महीने (लगभग 8 सप्ताह) की “समर रिसर्च फेलोशिप प्रोग्राम (SRFP)” शुरू की है, जिसमें चयनित छात्रों को हफ्ते के हिसाब से स्टाइपेंड दिया जाएगा और उन्हें आईआईटी कैंपस में रहने‑रिसर्च करने का भी मौका मिलेगा।
फेलोशिप की अवधि और पैसे
- फेलोशिप आमतौर पर 13 मई 2026 से 13 जुलाई 2026 तक चलती है, यानी लगभग 2 महीने या 8–10 सप्ताह की अवधि।
- चयनित छात्रों को प्रति सप्ताह 2000 रुपये की स्टाइपेंड दी जाती है; यानी 8 सप्ताह में कुल लगभग 16,000 रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
किसके लिए मौका है?
- यह फेलोशिप BE/B.Tech, ME/M.Tech जैसे इंजीनियरिंग और तकनीकी कोर्स में अध्ययनरत छात्रों के लिए है, जो गर्मियों की छुट्टियों में आईआईटी दिल्ली की फैकल्टी के मार्गदर्शन में रिसर्च प्रोजेक्ट करना चाहते हैं।
- आमतौर पर उम्मीदवार को अपने संस्थान में शीर्ष रैंक वाला होना चाहिए और आईआईटी दिल्ली का छात्र नहीं होना चाहिए।
क्या‑क्या सुविधाएँ मिलती हैं?
- निःशुल्क आवास और भोजन: चयनित छात्रों को आईआईटी दिल्ली के हॉस्टल में रहने और भोजन की सुविधा दी जाती है।
- यात्रा भत्ता: देश‑भर के चयनित छात्रों को ट्रेन (स्लीपर क्लास) किराये का रिफंड या अनुदान मिलता है।
- रिसर्च और सर्टिफिकेट: फैलोशिप के दौरान छात्र आधुनिक लैब में रिसर्च प्रोजेक्ट करते हैं और प्रोग्राम सफलतापूर्वक पूरा करने पर आईआईटी दिल्ली से रिसर्च सर्टिफिकेट मिलता है, जो आगे की ग्रेजुएशन या जॉब के लिए फायदेमंद रहता है।
आवेदन की तारीखें और लिंक
- आवेदन शुरू: 16 मार्च 2026
- अंतिम तिथि: 3 अप्रैल 2026 (शाम 5 बजे तक)
- चयन सूची: मई 2026 के पहले सप्ताह में आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगी।
- आवेदन करने के लिए: आईआईटी दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट और उसके एडमिशन/फेलोशिप पोर्टल पर जाकर Summer Research Fellowship Programme 2026 के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा।
अगर आप B.Tech/BE के किस वर्ष में हैं और किस ब्रांच (CSE, Electronics, Civil, Mechanical आदि) से हैं, तो बता दें; तो यह भी बता सकता हूँ कि आपके लिए इस फेलोशिप के लिए कैसी रिसर्च‑प्रोजेक्ट प्रोफाइल बनाना फायदेमंद रहेगा।
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