ब्रेकिंग न्यूज़
CUSB मीडिया विभाग में सहायक प्राध्यापक भर्ती विवाद: राष्ट्रपति और केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक पहुंची शिकायत
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के जनसंचार एवं मीडिया विभाग में सहायक एवं एसोसिएट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप, योग्यता उल्लंघन और चयन प्रक्रिया में पक्षपात की शिकायत।
बिहार।
गया जी के दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के जनसंचार एवं मीडिया विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। विभाग में पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में विज्ञापन जारी कर विभिन्न वर्गों के लिए पद रिक्त किए गए थे, लेकिन भर्ती प्रक्रिया विवादों में फंस गई है। शिकायतकर्ता ने राष्ट्रपति, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को शिकायत भेजकर मामले की जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि EWS श्रेणी में नियुक्त किए गए कुछ उम्मीदवारों के पास मास कम्युनिकेशन में न तो Ph.D. है और न ही NET, तब भी उन्हें इंटरव्यू तक शामिल किया गया। इनमें से एक उम्मीदवार की Ph.D. गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर डायस्पोरा स्टडीज’ से है, जहां मास कम्युनिकेशन विभाग तक मौजूद नहीं है। जबकि विज्ञापन में स्पष्ट रूप से मास कम्युनिकेशन में NET/Ph.D. अनिवार्य बताया गया था।
इसके अलावा, बिना आधिकारिक परिणाम घोषित किए ही चयनित उम्मीदवारों के नाम लीक होने का भी आरोप है। बताया गया है कि ओबीसी से डॉ. अनिंद्य देब, सामान्य वर्ग से डॉ. नेहा निगम, ईडब्ल्यूएस से डॉ. अनुज कुमार सिंह और एक विभागीय सहायक प्राध्यापक की पदोन्नति से संबंधित जानकारी पहले ही सार्वजनिक हो चुकी थी।
स्क्रूटनी पैनल में प्रो. ओ.पी. सिंह, प्रो. अनुराग दवे और प्रो. के. शिव शंकर थे, जबकि इंटरव्यू पैनल में प्रो. शंभूनाथ सिंह, प्रो. देवब्रत सिंह, प्रो. मनुकोंडा, प्रो. के. शिव शंकर के साथ कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह शामिल थे।
इसके अलावा, अन्य कैंडिडेट्स ने भी अनुभव प्रमाणपत्र के बावजूद API स्कोर न मिलने, और विज्ञापन में दो पदों की घोषणा के बावजूद वेबसाइट पर केवल एक पद ही खाली दिखाए जाने जैसी गड़बड़ियों की शिकायत की है। खासतौर पर, एक सामान्य वर्ग की महिला उम्मीदवार के चयन को लेकर सवाल उठे हैं, जिसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पूर्व सहायक प्राध्यापक डॉ. रवि सूर्यवंशी की पत्नी बताया जा रहा है।
यह मामला विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता नियमों के पालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करता है, और इसकी जांच कराकर न्याय सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से उठ रही है।
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उत्तर प्रदेश -झारखंड में भीषण गर्मी का कहर, स्कूलों की टाइमिंग बदली
उत्तर प्रदेश और झारखंड में भीषण गर्मी और हीटवेव के चलते राज्य सरकारों ने शीतकालीन/सामान्य टाइमिंग के बजाय स्कूलों की समय‑सारणी बदल दी है, ताकि बच्चे दोपहर की झुलसाती धूप और लू से बच सकें।
उत्तर प्रदेश में क्या आदेश है
- कई जिलों में स्कूलों की दोपहर की गर्मी से बचाने के लिए समय को सुबह की ओर शिफ्ट किया गया है, जैसे कक्षाएँ अब सुबह जल्दी शुरू और दोपहर से पहले खत्म करवाने के निर्देश।
- जहाँ तापमान अत्यधिक रहता है, वहाँ स्कूल दिनचर्या छोटी और हल्की रखने, लंबे ब्रेक और छत्र/पंखे/पानी की व्यवस्था को बेहतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
झारखंड में नई स्कूल टाइमिंग
- झारखंड सरकार के निर्देश पर रांची और अन्य जिलों के सभी प्रकार के स्कूलों (सरकारी, गैर‑सरकारी, निजी सहित) की समय‑सारणी बदली गई है।
- नई टाइमिंग का मुख्य ढांचा (लगभग):
- KG से कक्षा 8 तक: सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक कक्षा।
- कक्षा 9 से 12 तक: सुबह 7:00 बजे से 12:00 बजे तक कक्षा।
शिक्षकों और स्टाफ के लिए आदेश
- झारखंड में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहकर गैर‑शैक्षणिक कार्य (बैठक, रिकॉर्ड, बोर्ड पर काम आदि) करने का निर्देश दिया गया है।
- यह आदेश 21 अप्रैल 2026 से प्रभावी है और भीषण गर्मी से बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
अभिभावकों के लिए ज़रूरी बातें
- अपने ज़िले/शहर के शिक्षा विभाग या विद्यालय वाट्स‑एप ग्रुप से स्थानीय ऑर्डर ज़रूर चेक करें, क्योंकि कुछ ज़िलों में अलग टाइमिंग या अस्थायी छुट्टी भी हो सकती है।
- बच्चों को हल्के‑कपड़े, टोपी, पानी की बोतल और थोड़ा खाना ज़रूर दें, ताकि गर्मी और लू से कम से कम नुकसान हो।
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भिकनगांव–बिंजलवाड़ा उपवहन परियोजना से बदलेगी खेती की तस्वीर, 50 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य
खरगोन (मध्यप्रदेश)।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित भिकनगांव–बिंजलवाड़ा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जिले में आधुनिक कृषि का नया अध्याय लिख रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 50,164 हेक्टेयर क्षेत्र और 129 गांवों को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना को पांच पंप हाउस क्षेत्रों में विभाजित कर चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।
परियोजना के अंतर्गत पंप हाउस क्रमांक-1 (दौड़वा लोहारी) क्षेत्र में पिछले वर्ष मार्च-अप्रैल से सिंचाई शुरू हो चुकी है। कुल 6995 हेक्टेयर क्षेत्र में से अब तक 4663 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है और 15 मई तक पूरे क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पंप हाउस क्रमांक-2 (बावड़िया) क्षेत्र में 1 अप्रैल से सिंचाई शुरू की गई है। यहां 2924 हेक्टेयर क्षेत्र में से फिलहाल हीरापुर, बिंजलवाड़ा और दशोड़ा तालाबों के माध्यम से लगभग 1200 हेक्टेयर क्षेत्र में पानी पहुंचाया जा रहा है। शेष क्षेत्र को भी 15 मई तक सिंचित करने की योजना है।
पंप हाउस क्रमांक-3 (भगवानपुरा) क्षेत्र में नवंबर 2025 से कार्य शुरू हुआ था। वर्तमान में आखापुरा तालाब, सांगवी, केदवा, साइखेड़ी और अमनखेड़ी नालों के जरिए 10595 हेक्टेयर में से 7870 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। इसे 30 मई तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
पंप हाउस क्रमांक-4 (खारवी) क्षेत्र, जो 16328 हेक्टेयर में फैला है, में पाइपलाइन बिछाने का कार्य अंतिम चरण में है। क्षेत्रीय सीमांकन में बदलाव के चलते कुछ देरी हुई, लेकिन अब 30 जून तक इस क्षेत्र में सिंचाई शुरू करने की तैयारी है।
पंप हाउस क्रमांक-5 (बढ़िया) क्षेत्र में मार्च से कार्य शुरू किया गया है। सुल्तानपुरा और शिवना नदियों सहित कई नालों और तालाबों में पानी छोड़कर 13322 हेक्टेयर में से 8108 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित किया जा रहा है। इसे भी 30 मई तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।
परियोजना के प्रमुख बिंदुओं में 30 जून तक संपूर्ण कार्य पूर्ण करना, पाइपलाइन सुरक्षा के लिए प्राइमरी फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाना और गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।
प्राधिकरण ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें। प्रत्येक 20 हेक्टेयर पर स्थापित OMS पेटी में चार आउटलेट दिए गए हैं, जिनका उपयोग बारी-बारी से किया जाना चाहिए। एक समय में केवल दो आउटलेट संचालित करने की सलाह दी गई है, ताकि सभी किसानों को पर्याप्त पानी मिल सके।
यह परियोजना विशेष रूप से ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के लिए बनाई गई है, जिससे पानी की बचत के साथ उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित हो सके। किसानों से अनुरोध किया गया है कि वे इन आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की यह पहल न केवल सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्र में कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।क्षेत्रों में संचालित योजना से 52 गांवों को लाभ, जून तक 100% सिंचाई कवरेज का लक्ष्य
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जावर उपवहन परियोजना से बदलेगा कृषि परिदृश्य, 26 हजार हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य
खंडवा (मध्यप्रदेश)।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित जावर सूक्ष्म सिंचाई (उपवहन) परियोजना क्षेत्र में आधुनिक कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। इस परियोजना के तहत 26,128 हेक्टेयर क्षेत्र और 52 गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना को दो प्रमुख पंप हाउस और चार क्षेत्रों में विभाजित कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है।

पंप हाउस-1 (सुरवाड़िया) क्षेत्र 5639 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जहां नवंबर से सिंचाई कार्य प्रारंभ किया गया था। शिवना, देवाक्षिरी और सावरिया तालाब सहित कई नालों में पानी छोड़कर वर्तमान में लगभग 2500 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित किया जा रहा है। शेष क्षेत्र को 15 मई तक कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पंप हाउस-2 (जावर) को तीन भागों—क्षेत्र 2, 3 और 4—में विभाजित किया गया है।
• क्षेत्र-2 (3963 हेक्टेयर) में नवंबर से कार्य शुरू हुआ, जहां रोहिणी तालाब और अन्य नालों के माध्यम से करीब 2000 हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है।
• क्षेत्र-3 (10955 हेक्टेयर) में जनवरी से कार्य प्रारंभ हुआ, जहां फिलहाल 1000 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो रहा है। कुछ तकनीकी व क्षेत्रीय बाधाओं के बावजूद इसे 30 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

• क्षेत्र-4 (5571 हेक्टेयर) में बल्दी, मुदवाड़ा, बढ़िया और अन्य नालों के माध्यम से लगभग 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। इसे 30 मई तक पूर्ण करने की योजना है।
परियोजना के अंतर्गत 30 जून तक संपूर्ण कार्य पूर्ण कर अगले सिंचाई सीजन तक 100% क्षेत्र को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है। पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए प्राइमरी फिल्ट्रेशन सिस्टम भी स्थापित किया जा रहा है।
प्राधिकरण द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे परियोजना के दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रत्येक 20 हेक्टेयर पर स्थापित OMS पेटियों में चार आउटलेट दिए गए हैं, जिनका उपयोग बारी-बारी से किया जाना आवश्यक है। एक समय में केवल दो आउटलेट संचालित करने से सभी किसानों को समान रूप से पानी मिल सकेगा।
यह परियोजना विशेष रूप से ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के लिए डिजाइन की गई है, जिससे जल संरक्षण के साथ उत्पादन और आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके। किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने और अवैध जल उपयोग से बचने की सलाह दी गई है।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की यह पहल खंडवा जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
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