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विदेशी शिक्षा

ऑस्ट्रेलिया का बड़ा ऐलान, अब ज्यादा संख्या में मिलेगा विदेशी स्टूडेंट्स को एडमिशन

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ऑस्ट्रेलिया ने 2025 के लिए विदेशियों के रूप में आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को कुल 2.7 लाख (270,000) तक सीमित करने का बड़ा फैसला किया है। इसका मकसद देश में रिकॉर्ड माइग्रेशन को नियंत्रित करना और बढ़ते मकान किराए की समस्या से निपटना है। यह संख्या उच्च शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (VET) पाठ्यक्रमों में शामिल सभी छात्रों पर लागू होगी। इस नयी कोटा नीति के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय को देश और राज्य अनुसार अलग-अलग छात्र संख्या का कोटा मिलेगा।

इस फैसले से भारत समेत कई देशों के छात्रों पर असर पड़ेगा, खासकर पंजाब के छात्रों पर क्योंकि वहां से ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या अधिक है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया ने विदेशी छात्रों के स्टूडेंट वीज़ा शुल्क को भी 710 ऑस्ट्रेलियन डॉलर से बढ़ाकर 1600 डॉलर कर दिया है, ताकि माइग्रेशन को और नियंत्रित किया जा सके।

ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने बताया कि यह कदम प्रवासन नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा है। इस फैसले से 2025 में विदेशों से आने वाले छात्रों की संख्या पर प्रभाव पड़ेगा और फरवरी में admission लेने की तैयारी कर रहे छात्रों को सबसे ज्यादा फर्क महसूस होगा। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में लगभग 1.22 लाख भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हैं, जो कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन के बाद चौथा सबसे अधिक है.

साथ ही, 1 जनवरी 2025 से ऑस्ट्रेलिया के स्टूडेंट वीज़ा नियमों में भी बदलाव होगा, जिसमें अब छात्रों को पहले विश्वविद्यालय से एडमिशन मिलना और कंफर्मेशन ऑफ एन्क्रॉलमेंट (CoE) प्राप्त करना अनिवार्य होगा, तभी वे वीज़ा के लिए आवेदन कर सकेंगे.

इसलिए, ऑस्ट्रेलिया की यह नई नीति विदेशी छात्रों की संख्या पर नियंत्रण तो लगाएगी, लेकिन अधिक संख्या में एडमिशन देने के बजाय सीमित संख्या में ही प्रवेश मिलेगा। अतः यह एक बड़ा बदलाव है जो विदेशी छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों की योजना और करियर को प्रभावित कर सकता है।

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करियर गाइडेंस

जर्मनी में पढ़ने जा रहे भारतीय छात्र जानें, पार्ट-टाइम जॉब कैसे मिलेगी

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जर्मनी में पढ़ने वाले भारतीय छात्र पार्ट‑टाइम जॉब से अपने खर्चे आसानी से कवर कर सकते हैं, लेकिन वीजा नियम, जर्मन भाषा और जगह‑सर्च दोनों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।


1. पार्ट‑टाइम जॉब के नियम (छात्रों के लिए)

  • जर्मन स्टूडेंट वीजा के तहत ज्यादातर छात्रों को हफ्ते में 120 फुल डे या 240 हाफ‑डे जॉब की इजाज़त है, यानी करीब 20 घंटे प्रति सप्ताह क्लास के दौरान।
  • सेमेस्टर ब्रेक में आप फुल‑टाइम काम कर सकते हैं, लेकिन कुल लिमिट इन्हीं 120/240 दिनों के अंदर रखना होता है ताकि वीजा परेशानी न हो।

2. आम पार्ट‑टाइम जॉब के ऑप्शन

इन जॉब्स पर ज्यादातर भारतीय स्टूडेंट्स काम करते हैं:

  • कैफे, रेस्तरां, बेकरी, फास्ट‑फूड चेन में वेटर / कैशियर
  • सुपरमार्केट, रिटेल शॉप में बिलिंग, स्टॉकिंग
  • डिलीवरी (फूड, ऑनलाइन शॉपिंग), ट्यूशन टीचर (गणित, कंप्यूटर, भारतीय भाषाएं)
  • यूनिवर्सिटी में रिसर्च असिस्टेंट, लैब असिस्टेंट या इंटरनशिप टाइप वर्क।

3. कहां ढूंढें जॉब ऑनलाइन?

ये प्लेटफॉर्म जर्मनी में पार्ट‑टाइम जॉब के लिए बहुत इस्तेमाल होते हैं:

  • Stepstone.de, Indeed.de, Stellenanzeigen.de – बड़े जॉब पोर्टल, यहां “Minijob” या “Teilzeit” फिल्टर रखें।
  • LinkedIn, Facebook Groups (जैसे “Jobs in Berlin / Munich / Frankfurt for students”) – लोकल ऑफर जल्दी मिलते हैं।
  • Campus‑specific पोर्टल और यूनिवर्सिटी करियर सेंटर – अक्सर ऑन‑कैंपस जॉब और रेस्तरां/कैंटीन में वेकेंसी निकलती हैं

4. चाहिए क्या बेसिक चीजें?

  • जर्मनी आने से पहले थोड़ा‑बहुत जर्मन सीख लें – रेस्तरां, सुपरमार्केट या डिलीवरी जॉब के लिए जर्मन बहुत फायदेमंद है, हालांकि आईटी/कैंपस जॉब में अंग्रेजी भी चल सकती है।
  • आवश्यक दस्तावेज: पासपोर्ट, वीज़ा, रजिस्ट्रेशन (Anmeldung), बैंक अकाउंट, थोड़ा अनुभव वाला रिज्यूमे (CV in German/English)।

5. भारतीय छात्रों के लिए अच्छा है या नहीं?

  • जर्मनी में अभी भी स्किल्ड वर्कर की कमी है, इसलिए छात्रों के लिए वीज़ा + जॉब दोनों का ऑप्शन अच्छा है, खासकर इंजीनियरिंग, IT और हेल्थकेयर में।
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इनोवेशन और स्टार्टअप

भारत-EU के बीच हुई FTA डील से यूरोप में भारतीयों के लिए नौकरी और पढ़ाई होगी आसान

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 27 जनवरी 2026 को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हुए, जो भारतीयों के लिए यूरोप में नौकरी और पढ़ाई के रास्ते खोलेगा।
यह डील 18 साल की लंबी वार्ता के बाद हुई, जिसमें व्यापार, सेवाओं और लोगों की आवाजाही को बढ़ावा दिया गया।

नौकरी और पढ़ाई पर असर

FTA से IT, सर्विस सेक्टर और अन्य प्रोफेशनल्स के लिए वीजा प्रक्रिया आसान होगी, जिससे लाखों भारतीयों को EU देशों (जैसे जर्मनी, फ्रांस) में काम के अवसर मिलेंगे।​
शिक्षा क्षेत्र में स्टूडेंट वीजा और स्किल्ड वर्कर मोबिलिटी बढ़ेगी, खासकर MSMEs और लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स में।​
निर्यात दोगुना होने से रोजगार सृजन होगा, लेकिन तुर्की जैसे देशों के सामान पर पाबंदी रहेगी।​

आर्थिक फायदे

भारत को EU के 97% टैरिफ लाइंस में एक्सेस मिलेगा, जबकि EU को भारत के 92% बाजार में।​
ऑटो सेक्टर में इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटकर 10% होगी (2.5 लाख यूनिट कोटा), लेकिन EVs को 5 साल छूट।

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विदेशी शिक्षा

गिरते रुपये ने विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों का खर्च अचानक बढ़ा दिया है, जिससे परिवारों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

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हां, गिरते रुपये ने विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के लिए ट्यूशन फीस, रहने-खाने और अन्य खर्चों को अचानक बढ़ा दिया है, जिससे परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है।

रुपये की गिरावट का स्तर

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 रुपये के आसपास पहुंच गया है, जो पिछले आठ-नौ महीनों में 84 रुपये से लगभग 7% की गिरावट दर्शाता है। इस कमजोरी से विदेशी मुद्रा में चुकाए जाने वाले सभी खर्च सीधे महंगे हो जाते हैं, खासकर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में।

छात्रों पर प्रभाव

2024 में 7.6 लाख भारतीय छात्रों ने उच्च शिक्षा के लिए विदेश का रुख किया, लेकिन अब मासिक खर्च 20-30 हजार रुपये और सालाना 2-3 लाख रुपये अतिरिक्त बढ़ गया है। उदाहरणस्वरूप, 50,000 डॉलर की सालाना फीस पहले 41.5 लाख रुपये थी, जो अब 44.7 लाख रुपये हो गई। एजुकेशन लोन के ब्याज और वीजा प्रोसेसिंग फीस में भी 4% की बढ़ोतरी हुई है।

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परिवारों की चुनौतियां

परिवार घरेलू खर्चों के साथ लोन किस्तें चुकाते हुए अतिरिक्त बोझ झेल रहे हैं, जबकि छात्र पार्ट-टाइम नौकरियां कर रहे हैं। कुछ छात्र सस्ते देशों पर विचार कर रहे हैं या पढ़ाई बीच में छोड़ने की सोच रहे हैं।

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