करंट अफेयर्स
ट्रंप को अदालत में घसीटने वाली हार्वर्ड यूनिवर्सिटी कितनी अमीर है?
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अमेरिकी अदालत में मुकदमा दायर करने वाली हार्वर्ड यूनिवर्सिटी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित है, बल्कि संपत्ति और संसाधनों के मामले में भी दुनिया की सबसे अमीर यूनिवर्सिटी मानी जाती है।
दुनिया की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी एंडोमेंट
• हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का कुल एंडोमेंट (निधि) 2024 के अंत तक $53.2 अरब (करीब 4.4 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा शैक्षणिक एंडोमेंट बनाता है।
• यह एंडोमेंट 14,600 से अधिक अलग-अलग फंड्स में बंटा है, जिनमें से अधिकांश दानदाताओं द्वारा विशिष्ट उद्देश्यों (जैसे स्कॉलरशिप, रिसर्च, फैकल्टी, आदि) के लिए निर्धारित हैं।
• हर साल हार्वर्ड अपने एंडोमेंट का लगभग 5% (2024 में करीब $2.4 अरब) अपने ऑपरेशनल खर्चों, रिसर्च, स्कॉलरशिप और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में खर्च करती है।

क्या यह धन तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है?
• आम धारणा के विपरीत, हार्वर्ड का पूरा एंडोमेंट बैंक खाते की तरह तुरंत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
• करीब 80% एंडोमेंट फंड्स दानदाताओं की शर्तों के अनुसार ही खर्च किए जा सकते हैं, और केवल 20% फंड्स ही अपेक्षाकृत लचीले हैं।
• बड़ी राशि हेज फंड्स, प्राइवेट इक्विटी, और रियल एस्टेट में निवेशित है, जिसे तुरंत नकद में बदलना संभव नहीं होता।
फंडिंग विवाद और ट्रंप प्रशासन
• ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड की अरबों डॉलर की संघीय फंडिंग रोकने और टैक्स छूट खत्म करने की धमकी दी थी, जिससे यूनिवर्सिटी की रिसर्च और स्कॉलरशिप पर सीधा असर पड़ सकता था।
• हार्वर्ड ने अदालत में दलील दी कि फंडिंग रोकना न केवल विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि कैंसर, अल्जाइमर जैसी बीमारियों पर चल रही अहम रिसर्च को भी बाधित करेगा।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी न सिर्फ शिक्षा बल्कि संपत्ति के मामले में भी दुनिया की सबसे ताकतवर संस्थाओं में शुमार है। $53.2 अरब का एंडोमेंट इसे वित्तीय रूप से बेहद मजबूत बनाता है, लेकिन इस धन का अधिकांश हिस्सा दानदाताओं की शर्तों के अनुसार ही खर्च किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन के साथ कानूनी लड़ाई में हार्वर्ड की आर्थिक ताकत उसे लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता देती है, लेकिन यह भी सच है कि संघीय फंडिंग पर निर्भरता और कानूनी-प्रशासनिक शर्तें उसकी सीमाएं भी तय करती हैं।
करंट अफेयर्स
आइए जानते हैं ,भारत का पहला बजट कब और किसने पेश किया था?
भारत का पहला स्वतंत्र केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को आर.के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था।
ब्रिटिश काल का पहला बजट
भारत में आधुनिक बजट की शुरुआत 1860 में हुई, जब जेम्स विल्सन ने लंदन में ब्रिटिश संसद के समक्ष इसे प्रस्तुत किया। यह 1857 के विद्रोह के नुकसानों की भरपाई के लिए था।
स्वतंत्र भारत का पहला पूर्ण बजट
26 नवंबर 1947 का बजट अंतरिम था, जबकि लोकतांत्रिक भारत का पहला पूर्ण बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई ने पेश किया।
शाम को पेश होने की परंपरा
आजादी के बाद 1999 तक बजट शाम 5 बजे पेश होता था, जो ब्रिटिश समय के अनुसार इंग्लैंड में सुबह होने के कारण था। 1999 में यशवंत सिन्हा ने पहली बार सुबह 11 बजे इसे प्रस्तुत किया
करंट अफेयर्स
आइए जानते हैं कि भारत के किस शहर को कहा जाता है ‘इत्र की राजधानी’
भारत का शहर कन्नौज (उत्तर प्रदेश) ‘इत्र की राजधानी’ के नाम से जाना जाता है।
यह शहर प्राकृतिक फूलों से बने पारंपरिक अत्तर के उत्पादन के लिए सदियों से प्रसिद्ध है।
विशेषताएं
- कन्नौज में 200+ इत्र भट्टियाँ हैं, जो गुलाब, चमेली आदि से इत्र बनाती हैं।
- कन्नौज अत्तर को GI टैग मिला है, जो इसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करता है
बनाने की प्रक्रिया
- सामग्री: ताजे फूल (गुलाब, चमेली, बेला आदि) 50-60 किलो, चंदन का तेल (बेस ऑयल) और पानी।
- चरण: तांबे के बड़े बर्तन (डेग) में फूल डालें, पानी मिलाकर चिकनी मिट्टी से सील बंद करें। धीमी आंच लगाएं ताकि भाप बने।
- भाप को चोंगा (बांस/तांबे की नली) से ठंडे पानी वाली नांद में रखे भभका (रिसीवर) में भेजें, जहाँ संघनन होकर सुगंधित तेल अलग हो।
समय और पैकिंग
प्रक्रिया में 8-12 घंटे लगते हैं (मिट्टी इत्र में 2-3 दिन)। इत्र को छानकर कांच/पीतल की बोतलों में भरते हैं। यह पूरी तरह प्राकृतिक और बिना केमिकल का होता है।
करंट अफेयर्स
जानिए कैसा है भारत का पहला AI आंगनवाड़ी? ऐसे होती है डिजिटल पढ़ाई
भारत का पहला AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित आंगनवाड़ी महाराष्ट्र के नागपुर जिले के हिंगना तहसील के वडधामना गांव में खुला है। इसे ‘मिशन बाल भरारी’ पहल के तहत नागपुर जिला परिषद द्वारा शुरू किया गया है। इस AI आंगनवाड़ी को हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्घाटित किया। यह देश में ग्रामीण डिजिटल शिक्षा में एक बड़ा परिवर्तन लाने की कोशिश है।
यहां के बच्चों की पढ़ाई अब पारंपरिक चॉक-स्लेट की बजाय पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है – कक्षा में स्मार्टबोर्ड, वर्चुअल रियलिटी (VR) हेडसेट जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं। बच्चे AI-सक्षम स्मार्टबोर्ड के जरिए रंग-बिरंगे, इंटरेक्टिव कंटेंट के साथ गिनती, वर्णमाला, रंग और कहानियां सीखते हैं। शिक्षक बच्चों की प्रगति को ट्रैक करने के लिए AI-सिस्टम की मदद लेते हैं, जिससे हर बच्चे की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार सामग्री और गतिविधियां मिलती हैं। यह केंद्र बच्चों में डिजिटल लर्निंग की आदत शुरू से ही डाल रहा है, जिससे उनका स्किल बेस भविष्य के लिए मजबूत बनता है।
यह AI आंगनवाड़ी सुविधाओं के मामले में प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे रही है — यहां बच्चों का नामांकन दोगुना हो गया है और डिजिटल गैप तेजी से कम हो रहा है। बच्चों की पढ़ाई अब आधुनिक, रंगीन और टेक्नोलॉजी से लैस माहौल में चल रही है, जो ग्रामीण शिक्षा की गुणवत्ता और आकर्षण दोनों को एक नई ऊंचाई देता है।
संक्षिप्त में:
- अब चॉक-स्लेट की जगह स्मार्टबोर्ड व डिजिटल टूल्स।
- VR हेडसेट, AI-आधारित प्रगति ट्रैकिंग, रंगीन व इंटरेक्टिव कंटेंट।
- बच्चों की उपस्थिति व नामांकन में भारी वृद्धि।
- डिजिटल लर्निंग गांवों तक पहुंची, जिससे शिक्षा और ज्यादा रोचक व प्रभावशाली हुई है।
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